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ले चल यहां भुलावा देकर मेरे नाविक धीरे धीरे-11-Jul-2023

शीर्षक -ले चल वहाँ भुलावा देकर, मेरे नाविक धीरे-धीरे

संसार है एक सुंदर सृजन,
बसे इसमें दुख-सुख और आंनद। 
जहां मिले शांति हृदय को,
ले चल वहाँ भुलावा देकर, मेरे नाविक धीरे-धीरे।।

आकार प्रकार की ना कोई चिंता हो,
मन में केवल आशा ही आशा हो।
करू वही जो भाए मेरे मन को,
ले चल वहाँ भुलावा देकर, मेरे नाविक धीरे-धीरे।।

किंतु- परन्तु के असमंजस में ना पड़ूं,
कहीं भी मैं अब ना ठहरूं।
कोई आकार दे दो मुझको,
ले चल वहाँ भुलावा देकर, मेरे नाविक धीरे-धीरे।।

शाहाना परवीन "शान"...✍️
मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) 

प्रतियोगिता-आधे अधूरे मिसरे/प्रसिद्ध पंक्तियाँ 
दिनांक: 11/07/2023
शाहाना परवीन "शान"...✍️

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2 Comments

सुन्दर सृजन

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Gunjan Kamal

14-Jul-2023 11:18 AM

बहुत खूब

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